Rajput Era
Subject: Rajasthan History
Sample Practice Questions
Question 1: सूची I को सूची II से सुमेलित करें :सूची I (क्षेत्र)सूची II (राजवंश)a. मेवाड़I. कच्छवाहाb. मारवाड़II. राठौड़c. आबूIII. परमारd. आमेरIV. गुहिल-
- a-IV, b-II, c-III, d-I
- a-IV, b-III, c-I, d-II
- a-IV, b-III, c-II, d-I
- a-IV, b-I, c-III, d-II
Explanation: मेवाड़ → गुहिल (गुहिलोत/सिसोदिया)मारवाड़ → राठौड़ आबू (माउंट आबू) → परमार आमेर (जयपुर) → कच्छवाहा
Question 2: निम्नलिखित में से कौन नागर ब्राह्मणों के राजपूतों की उत्पत्ति के सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाला पहला व्यक्ति था -
- डॉ. डी. आर. भंडारकर
- कर्नल जेम्स टॉड
- डॉ. दशरथ शर्मा
- वी. ए. स्मिथ
Explanation: डाॅ. डी. आर. भण्डारकर राजपूतों को गुर्जर मानकर उनका संबंध श्वेत-हूणों के स्थापित करके विदेशी वंशीय उत्पत्ति को और बल देते हैं। इसकी पुष्टि में वे बताते हैं कि पुराणों में गुर्जर और हूणों का वर्णन विदेशियों के सन्दर्भ में मिलता है। इसी प्रकार उनका कहना है कि अग्निवंशीय प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान भी गुर्जर थे, क्योंकि राजोर अभिलेख में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है। इनके अतिरिक्त भण्डारकर ने बिजौलिया शिलालेख के आधार पर कुछ राजपूत वंशों को ब्राह्मणों से उत्पन्न माना है। वे चौहान को वत्स गोत्रीय ब्राह्मण बताते हैं और गुहिल राजपूतों की उत्पत्ति नागर ब्राह्मणों से मानते हैं।
Question 3: राजपूतों की उत्पत्ति का अग्नि-कुंड सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया -
- चन्द्र बरदाई ने
- बरुई ने
- जोधराज ने
- अमीर खुसरो ने
Explanation: राजपूतों का विशुद्ध जाति से उत्पन्न होने के मत को बल देने के लिए उनको अग्निवंशीय बताया गया है। इस मत का प्रथम सूत्रपात चन्दबरदाई के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पृथ्वीराजरासो’ से होता है। उसके अनुसार राजपूतों के चार वंश प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ कुण्ड से राक्षसों के संहार के लिए उत्पन्न किये गये।
Question 4: नागर ब्राह्मणों से राजपूतों की उत्पत्ति का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया -
- डॉ. डी.आर. भंडारकर
- विंसेंट स्मिथ
- गौरी शंकर
- जेम्स टॉड
Explanation: डॉ. डी.आर. भण्डारकर ने बिजौलिया शिलालेख के आधार पर कुछ राजपूत वंशों को ब्राह्मणों से उत्पन्न माना है। वे चौहान को वत्स गोत्रीय ब्राह्मण बताते हैं और गुहिल राजपूतों की उत्पत्ति नागर ब्राह्मणों से मानते हैं।
Question 5: 7 वीं शताब्दी से 12 वीं शताब्दी का काल कौनसा काल कहलाता है -
- राजपूत काल
- तुगलक काल
- वर्द्धन काल
- मराठा काल
Explanation: हर्षवर्धन की मृत्यु (648 ई.) से लेकर मुहम्मद गौरी के भारत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना करने (1206 ई.) तक का काल भारतीय इतिहासस में राजपूत काल के नाम से प्रसिद्ध है।
Question 6: किन विद्वानों ने राजपूतों को सीथियन मानकर उन्हें मध्य एशिया से आया बताया -
- टाॅड व ब्रुक
- डाॅ. दशरथ शर्मा
- गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा
- बी. बी. लाल
Explanation: राजपूताना के प्रसिद्ध इतिहाससकार कर्नल जेम्स टाॅड ने राजपूतों को शक और सीथियन बताया है। इसके प्रमाण में उनके बहुत से प्रचलित रीति-रिवाजों का, जो शक जाति के रिवाजों से समानता रखते थे, उल्लेख किया है। टाॅड की पुस्तक के सम्पादक विलियम क्रुक ने भी इसी मत का समर्थन किया है परन्तु इस विदेशी वंशीय मत का गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने खण्डन किया है।
Question 7: चीनी यात्री फा फाह्यायन ने राज्य के किस नगर की यात्रा की थी -
- भीनमाल
- बैराठ
- माध्यमिका
- शाकाम्भरी
Explanation: चीनी यात्री ह्वेनसांग जब भीनमाल आया तो उसने अपने 72 देशों के वर्णन में इसे कू-चे-लो(गुर्जर) बताया तथा उसकी राजधानी का नाम ‘पीलोमोलो/भीलामाल’ यानि भीनमाल बताया।
Question 8: गौरी शंकर ओझा और मुहणोत नैंसी के अनुसार गोहिल वंश थे
- सुर्यवंशी
- अग्नी वंशी
- यज्ञकुंड से
- ब्राह्मण वंशी
Explanation: मेवाड़ के गुहिल - इस वंश का आदिपुरुष गुहिल था। इस कारण इस वंश के राजपूत जहाँ-जहाँ जाकर बसे उन्होंने स्वयं को गुहिलवंशीय कहा। गौरीशंकर हीराचन्द ओझा गुहिलों को विशुद्ध सूर्यवंशीय मानते हैं, जबकि डी. आर. भण्डारकर के अनुसार मेवाड़ के राजा ब्राह्मण थे।
Question 9: ‘राजपूत वैदिक आर्यो की संतान है’ - इस मत के प्रतिपादक है -
- सूर्यमल्ल मिश्रण
- डा. गौरीशंकर ओझा
- डी. आर. भण्डारकर
- विलियम क्रुक
Explanation: ओझा का कहना है कि राजपूतों तथा विदेशियों के रस्मों-रिवाजों में जो समानता कर्नल टाॅड ने बतायी है, वह समानता विदेशियों से राजपूतों ने प्राप्त नहीं की है, वरन् उनकी सात्यता वैदिक तथा पौराणिक समाज और संस्कृति से की जा सकती है।
Question 10: अग्निकुण्ड के सिद्धान्त के अनुसार उत्पन्न अन्तिम व चौथा वीर राजपूत योद्धा कौनसा था -
- चौहान
- प्रतिहार
- सोलंकी
- परमार
Explanation: राजपूतों का विशुद्ध जाति से उत्पन्न होने के मत को बल देने के लिए उनको अग्निवंशीय बताया गया है। इस मत का प्रथम सूत्रपात चन्दबरदाई के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पृथ्वीराजरासो’ से होता है। उसके अनुसार राजपूतों के चार वंश प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ कुण्ड से राक्षसों के संहार के लिए उत्पन्न किये गये।