Rajasthan Public Service Commission
Subject: Rajasthan Polity & Administration
Sample Practice Questions
Question 1: राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा लागू किए गये नवाचारों और उनके लागू होने के वर्ष का त्रुटिपूर्ण युग्म पहचानिए :नवाचार - लागू होने का वर्ष
- ऑनलाइन एप्लिकेशन - 2012
- माई एग्जाम माई ऑनलाइन रिव्यू यस (मेमोरी) - 2013
- ऑनलाइन आपत्तियाँ - 2014
- आगन्तुक प्रबंधन प्रणाली - 2018
Explanation: ऑनलाइन एप्लीकेशन (वर्ष 2011 से): आयोग द्वारा वर्ष 2010-2011 से विभागिन्न भर्तियों हेतु आवेदन ऑफलाइन पद्दति से न आमंत्रित कर ऑनलाइन माध्यम से आमंत्रित किये जाने लगे। आयोग द्वारा वर्ष 2017 तक ऑनलाइन आवेदन स्वयं के ऑनलाइन पोर्टल से आमंत्रित किये जाते थे। इस पोर्टल के माध्यम से विभागिन्न विज्ञापनों से लगभग 75 लाख ऑनलाइन आवेदन आयोग द्वारा आमंत्रित किये गए थे। वर्ष 2018 से ऑनलाइन आवेदन स्टेट रिक्रूटमेंट पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किये जा रहे हैं।
Question 2: राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए -(i) इसके सदस्य को उसके पद से राष्ट्रपति के आदेश द्वारा केवल कदाचार के आधार पर, उच्चतम न्यायालय से ऐसा प्रतिवेदन मिलने पर, हटाया जा सकता है।(ii) राष्ट्रपति आदेश द्वारा किसी सदस्य को हटा सकेगा, यदि उसकी राय में वह सदस्य मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण अपने पद पर बने रहने के अयोग्य है।ऊपर दिए गए कथन/कथनों में से कौनसा/से सही है/हैं -
- (i) व (ii) दोनों सही हैं।
- न तो (i) और ना ही (ii) सही है।
- केवल (ii) सही है।
- केवल (i) सही है।
Explanation: संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत RPSC सदस्य को कदाचार पर राष्ट्रपति हटा सकता है, लेकिन उच्चतम न्यायालय की जांच रिपोर्ट के बाद। साथ ही, मानसिक या शारीरिक अक्षमता पर राष्ट्रपति सीधे हटा सकता है, यदि वह अयोग्य मानता है।
Question 3: विधि द्वारा गठित किसी निगमित निकाय की सेवाओं के संबंध में, राजस्थान लोक सेवा आयोग के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति किसके पास है -
- राजस्थान के मुख्य सचिव
- राजस्थान राज्य विधानसभा
- राष्ट्रपति
- संसद
Explanation: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 321 के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग के कृत्यों का विस्तार (जैसे निगमित निकायों की सेवाओं में) राज्य विधानसभा द्वारा किया जा सकता है।
Question 4: भारत के संविधान के किस प्रावधान के तहत, राजस्थान सरकार के अधीन सेवारत किसी व्यक्ति को प्रभावित करने वाले अनुशासनात्मक मामलों से संबंधित राजस्थान लोक सेवा आयोग से परामर्श करना अनिवार्य है -
- अनुच्छेद 311 (4)
- अनुच्छेद 310 (1)
- अनुच्छेद 320 (3)
- अनुच्छेद 325 (2)
Explanation: अनुच्छेद 320 (3) राज्य लोक सेवा आयोग से अनुशासनात्मक मामलों में परामर्श अनिवार्य बनाता है।
Question 5: राजस्थान लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को पद से हटाने के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए :(i) उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले की जाँच कर सकारात्मक रिपोर्ट करने के पश्चात् किसी सदस्य को केवल कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है।(ii) राष्ट्रपति किसी सदस्य को आदेश द्वारा सीधे हटा सकता है, यदि राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण वह अपने पद पर बने रहने के अयोग्य है।
- केवल (i) सही है।
- केवल (ii) सही है।
- (i) व (ii) दोनों सही हैं।
- न तो (i), न ही (ii) सही है।
Explanation: भारतीय संविधान के अनुसार, अनुच्छेद 317 के तहत, राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों को हटाने का काम भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है, तो राष्ट्रपति, अध्यक्ष या ऐसे अन्य सदस्य को आदेश द्वारा पद से हटा सकेगा। राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य को दुर्व्यवहार के आधार पर हटाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित जांच की आवश्यकता होती है। सर्वोच्च न्यायालय की रिपोर्ट मिलने के बाद, राष्ट्रपति को उस पर कार्रवाई करने का अधिकार है।
Question 6: राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति तथा पदावधि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है -
- राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति राजस्थान के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा आयोग के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राजस्थान के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- राजस्थान का राज्यपाल कदाचार के आधार पर अध्यक्ष अथवा आयोग के किसी सदस्य को उसके पद से हटा सकता है।
- आयोग का सदस्य अपना पद संभालने से छः वर्ष की अवधि तक अथवा पैंसठ वर्ष की आयु पूर्ण करने तक, जो भी पहले हो, अपने पद पर बना रह सकता है।
Explanation: राजस्थान लोक सेवा आयोग में 1 अध्यक्ष एवं 10 सदस्य है। यह पद संवैधानिक है एवं राज्य के महामहिम राज्यपाल की आज्ञा से इन पदों पर नियुक्ति की जाती है। आयोग अध्यक्ष एवं सदस्य अधिकतम 6 वर्ष अथवा 62 वर्ष की उम्र जो भी पहले हो, के लिए आयोग में कार्यरत रहते है।
Question 7: राजस्थान लोक सेवा आयोग के गठन से पूर्व निम्न में से कौन सी तीन देशी रियासतों में लोक सेवा आयोग कार्य कर रहे थे -
- जोधपुर, जयपुर एवं बीकानेर
- कोटा, उदयपुर एवं जैसलमेर
- अलवर, भरतपुर एवं धौलपुर
- झालावाड़, बाँसवाड़ा एवं डूंगरपुर
Explanation: राजस्थान राज्य के गठन के समय कुल 22 प्रांतों में से मात्र 3 प्रांत-जयपुर, जोधपुर एवं बीकानेर में ही लोक सेवा आयोग कार्यरत थे । रियासतों के एकीकरण के बाद गठित राजस्थान राज्य के तत्कालीन प्रबंधन ने 16 अगस्त, 1949 को एक अध्यादेश के अधीन राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना की। इस अध्यादेश का प्रकाशन राजस्थान के राजपत्र में 20 अगस्त 1949 को हुआ और इसी तिथी से अध्यादेश प्रभाव में आया।
Question 8: राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है -
- मुख्यमंत्री
- राष्ट्रपति
- संसद
- राज्यपाल
Explanation: संविधान के भाग XIV में अनुच्छेद 315 से अनुच्छेद 323 के तहत राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) की संरचना, उसके सदस्यों की नियुक्ति और निष्कासन तथा SPSC की शक्तियों और कार्यों के बारे में प्रावधान किये गए हैं। SPSC के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
Question 9: पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिशों के आधार पर राजस्थान लोक सेवा आयोग का कार्यालय जयपुर से अजमेर कब स्थानांतरित किया गया -
- 1958
- 1965
- 1970
- 1972
Explanation: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) एक संवैधानिक निकाय है। संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 तक यूपीएससी व आरपीएससी से संबंधित प्रावधान है।रियासतों के विलय के उपरान्त दिनांक 16अगस्त, 1949 को राजस्थान के तत्कालीन राजप्रमुख द्वारा राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना हेतु ऑर्डिनेन्स जारी किया गया जो कि दिनांक 20 अगस्त, 1949 को प्रकाशित हुआ। आयोग कार्यालय फरवरी, 1952 से 31, अगस्त, 1958 तक जयपुर में विभागिन्न भवनों में रहा। तत्पश्चात् यह कार्यालय अजमेर स्थानांतरित किया गया।1958 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर इसका मुख्यालय अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया।
Question 10: राजस्थान के गठन के समय कितने प्रांतों में लोक सेवा आयोग कार्यरत थे -
- 5
- 3
- 7
- 9
Explanation: राजस्थान राज्य के गठन के समय कुल 22 प्रांतों में से मात्र 3 प्रांत जयपुर, जोधपुर एवं बीकानेर में ही लोक सेवा आयोग कार्यरत थे।