Gurjara Pratihar Dynasty
Subject: Rajasthan History
Sample Practice Questions
Question 1: मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश के विषय में निम्न कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए -(अ) घटियाला का शिलालेख मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश की जानकारी का प्रमुख स्रोत है।(ब) यह शिलालेख प्रसिद्ध प्रतिहार शासक कि्कुक ने उत्कीर्ण करवाया था।
- (अ) एवं (ब) दोनों सही नहीं हैं।
- केवल (अ) सही है।
- (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं।
- केवल (ब) सही है।
Explanation: प्रतिहार नरेशों के जोधपुर और घटियाला शिलालेखों से प्रकट होता है कि गुर्जर प्रतिहारों का मूल निवास स्थान गुर्जरात्र था। कि्कुक ने घटियाला (जोधपुर) में 861 ई. में दो शिलालेख लगवाये जिनमें राजस्थान में सर्वप्रथम सती प्रथा का उल्लेख हुआ है।
Question 2: रज्जिल किस प्रतिहार शाखा से सम्बन्धित था ?
- राजोगढ़
- उज्जैन
- जालौर
- मण्डोर
Explanation: रज्जिल (राज्जिल) मण्डोर प्रतिहार शाखा से संबंधित था। गुर्जर-प्रतिहारों की 26 शाखाओं में यह शाखा सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण थी। जोधपुर और घटियाला शिलालेखों के अनुसार हरिशचन्द्र नामक ब्राह्मण के दो पत्नियां थी। एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी भद्रा। क्षत्राणी भद्रा के चार पुत्रों भोगभट्ट, कद्दक, रज्जिल और दह ने मिलकर मण्डौर को जीतकर गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना की। रज्जिल तीसरा पुत्र होने पर भी मण्डौर की वंशावली इससे प्रारम्भ होती है।
Question 3: निम्न में से किस प्रतिहार शासक ने अपनी राजधानी मण्डोर से मेड़ता बदली -
- कि्कुक
- शीलुक
- नागभट्ट प्रथम
- रज्जिल
Explanation: नागभट्ट प्रथम ने मेड़ता जीतकर अपनी राजधानी बनाया। इतिहासस मे इसे नाहड़ के नाम से जाना जाता है। नागभट्ट प्रथम की रानी जज्जिका देवी से भोज व तात नामक दो पुत्र हुए। इसके पुत्र तात ने संन्यास धारण कर मंडौर के पवित्र आश्रम में जीवन बिताया तथा अपने छोटे भाई भोज को राज्य सौंप दिया।
Question 4: गुर्जर प्रतिहार राजवंश की स्थापना किसके द्वारा की गई थी -
- गोपाल
- नागभट्ट I
- मिहिरभोज
- कृष्ण I
Explanation: प्रतिहार वंश की भव्यता की नींव नागभट्ट प्रथम ने रखी , जिन्होंने 730-756 ई. के बीच शासन किया। अरबों के साथ सफल टकराव के कारण उनका शासन प्रमुख था। ये बड़े प्रतापी शासक थे इनका दरबार ‘नागावलोक का दरबार’ कहलाता था।
Question 5: निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में प्रतिहारों को गुर्जर शब्द से सम्बोधित नहीं किया गया है -
- यशस्तिलकचम्पू
- कुवलयमाला
- वंशभास्कर
- स्कन्दपुराण
Explanation: यशस्तिलकचम्पू, कुवलयमाला और स्कन्दपुराण के अभिलेखों में प्रतिहारों को गुर्जर के रूप में संदर्भित किया गया है। वंश भास्कर उन्नीसवीं शताब्दी में रचित राजस्थान के इतिहासस से सम्बंधित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक डिंगल काव्य ग्रंथ है। इसमें बूँदी राज्य एवं उत्तरी भारत का इतिहासस वर्णित है। वंश भास्कर की रचना चारण कवि सूर्यमल्ल मिश्रण द्वारा की गई थी जो बूँदी के हाड़ा शासक महाराव रामसिंह के दरबारी कवि थे।
Question 6: मण्डोर के प्रतिहारों के सम्बन्ध में निम्न में से कौन सा कथन सही नहीं है -
- हरिश्चन्द्र “रोहिलद्धि” के नाम से जाने जाते थे।
- रज्जिल से मण्डोर के प्रतिहारों की वंशावली प्रारम्भ होती है।
- नागभट्ट प्रथम मण्डोर से मेड़ता ले गया था।
- भोगभट्ट ने वल्लदेश के शासक देवराज भाटी को परास्त किया था।
Explanation: शीलुक ने सिद्धेश्वर महादेव मन्दिर (जोधपुर) का निर्माण करवाया। शीलूक ने त्रवणी (फलौदी) तथा वल्ल (जैसलमेर) को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया। शीलुक ने जैसलमेर के आस पास स्थित वल्लमण्डल के शासक देवराज भाटी को हराकर अधिकार कर लिया।
Question 7: प्रतिहारों के अभिलेखों में, राज्याधिकारियों को कहा जाता था-
- राजपुरुष
- सामंत
- दरबारी
- मंत्री
Explanation: प्रतिहार वंश के अभिलेखों में राज्याधिकारियों को राजपुरुष कहा जाता था।
Question 8: मिहिरभोज प्रथम और उनके उत्तराधिकारियों के योगदान के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है -
- मिहिरभोज ने राष्ट्रकूटों को पराजित कर उज्जैन पर अधिकार किया और उन्हें ‘आदिवराह’ की उपाधि मिली।
- महेन्द्रपाल प्रथम के दरबार में राजशेखर ने ‘कर्पूरमंजरी’ और ‘काव्यमीमांसा’ जैसे ग्रंथों की रचना की।
- महिपाल प्रथम के समय राष्ट्रकूट इन्द्र तृतीय ने कन्नौज को नष्ट किया, जिससे प्रतिहार शक्ति कमजोर हुई।
- मिहिरभोज ने अपने पुत्र महिपाल प्रथम को राज्य सौंपकर तीर्थयात्रा के लिए सिंहासन त्याग दिया।
Explanation: मिहिरभोज ने अपने पुत्र महेन्द्रपाल को राज्य सौंपकर सिंहासन त्यागा, न कि महिपाल प्रथम को। महिपाल प्रथम महेन्द्रपाल के पुत्र थे।
Question 9: वत्सराज के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है -
- वत्सराज ने कन्नौज पर अधिकार कर इसे प्रतिहार वंश की पहली राजधानी बनाया, लेकिन राष्ट्रकूट ध्रुव से हार गए।
- वत्सराज ने राष्ट्रकूटों को प्राजित करके उज्जैन पर अधिकार कर लिया।
- वत्सराज ने त्रिकोणात्मक संघर्ष की शुरुआत की और पाल शासक धर्मपाल को मुंगेर के युद्ध में हराया।
- वत्सराज ने उदयोतन सूरी को संरक्षण दिया, जिन्होंने ‘हरिवंश पुराण’ की रचना की।
Explanation: वत्सराज ने कन्नौज पर अधिकार किया और त्रिकोणात्मक संघर्ष शुरू किया, जिसमें उन्होंने धर्मपाल को मुंगेर में हराया। लेकिन कन्नौज को स्थायी राजधानी बनाने का कार्य नागभट्ट द्वितीय ने किया; ‘हरिवंश पुराण’ जिनसेन ने लिखा, न कि उदयोतन सूरी ने।मिहिरभोज ने राष्ट्रकूटों को प्राजित करके उज्जैन पर अधिकार कर लिया। इस समय राष्ट्रकूट वंश में कृष्ण द्वितीय का शासन था।
Question 10: नागभट्ट प्रथम के शासनकाल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी बात सही नहीं है -
- नागभट्ट प्रथम ने भीनमाल को अपनी राजधानी बनाया और बाद में उज्जैन पर अधिकार किया।
- नागभट्ट प्रथम ने सिन्ध के बिलोचों और अरबों के आक्रमण को रोका, जिसके लिए उन्हें ‘म्लेच्छों का नाशक’ कहा गया।
- अमोघवर्ष के संजन ताम्रपत्र के अनुसार, नागभट्ट प्रथम ने दंतिदुर्ग के हिरण्यगर्भ यज्ञ में प्रतिहार का कार्य किया।
- नागभट्ट प्रथम ने कन्नौज पर अधिकार कर इसे प्रतिहार वंश की स्थायी राजधानी बनाया।
Explanation: कन्नौज पर अधिकार नागभट्ट द्वितीय ने 816 ई. में किया, न कि नागभट्ट प्रथम ने। नागभट्ट प्रथम ने भीनमाल और उज्जैन को अपने केंद्र बनाया।